Tuesday, 22 October 2019, 11:30 AM

धर्म-संस्कृति

आप नहीं जानते होंगे श्राद्ध के रहस्य की ये 6 बातें

Updated on 23 September, 2019, 6:30
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानी पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यतानुसार अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से... Read More

दुनिया से जाने के बाद आपके पितरों की कैसी रही होगी गति?

Updated on 23 September, 2019, 6:15
गति बहुत महत्वपूर्ण है। गति होती है ध्वनि कंपन और कर्म से। यह दोनों ही स्थिति चित्त का हिस्सा बन जाती है। कर्म, विचार और भावनाएं भी एक गति ही है, जिससे चित्त की वृत्तियां निर्मित होती है। योग के अनुसार चित्त की वृत्तियों से मुक्ति होकर स्थिर हो जाना... Read More

 ध्वनि का प्राणी शरीर पर प्रभाव  

Updated on 23 September, 2019, 6:00
यह जानकर खुश होगें की ध्वनि का प्रभाव प्रत्येक जीव के शरीर पर पड़ता है। वर्तमान औधोगिकी करण और तकनीकि से ध्वनि प्रदूषण अधिक मात्रा में बढ़ रहा है। इस ध्वनि प्रदूषण के परिणाम देखते हुये नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. राबर्ट कॉक ने सन् 1925-26 में एक बात कही थी... Read More

श्राद्ध से बड़ा कल्याणप्रद और कोई मार्ग नहीं 

Updated on 22 September, 2019, 6:15
संसार में श्राद्ध से बढ़कर कोई दूसरा कल्याणप्रद मार्ग नहीं है। अत: बुद्धिमान मनुष्य को प्रयत्नपूर्वक श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध की आवश्यकता और लाभ पर अनेक ऋषि-महर्षियों के वचन ग्रंथों में मिलते हैं। यह कहना है कि महर्षि सुमन्तु का। उन्होंने श्राद्ध के लाभ बताए हैं। कुर्मपुराण में कहा गया... Read More

विचार-निर्विचार, चिंतन-अचिंतन 

Updated on 22 September, 2019, 6:00
पूरा विश्व, विचारों पर चलता है, सारे आविष्कार, युध्द, आतंकवाद, साहित्य सृजन, भाषण, प्रवचन, तू-तू, मैं-मैं सब विचारों की देन है। विचार ही सब कार्यों को अंजाम देता है। भक्ति, प्रार्थना, व्यवहार, सेवा सब विचारों की देन है। हम सोचते हैं तो करते हैं होता है। अब प्रश्न यह है... Read More

श्राद्ध में कौए को क्यों माना जाता है पितर? जानिए 10 रहस्य

Updated on 21 September, 2019, 6:30
भादौ महीने के 16 दिन कौआ हर घर की छत का मेहमान बनता है। ये 16 दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं। कौए एवं पीपल को पितृ प्रतीक माना जाता है। इन दिनों कौए को खाना खिलाकर एवं पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है। श्राद्ध... Read More

श्राद्ध और गया का महत्व 

Updated on 21 September, 2019, 6:15
पूर्व काल में गया नामक परम वीर्यवान एक असुर हुआ। उसने सभी प्राणियों को संतप्त कर रखा था। देवगण उसके वध की इच्छा से भगवान श्रीहरि विष्णु की शरण में गए। श्रीहरि ने उनसे कहा-आप लोगों का कल्याण होगा, इसका महादेह गिराया जाएगा। देवताओं ने बहुत अच्छा इस प्रकार कहा।... Read More

पाप कर्म का फल हानिकारक है 

Updated on 21 September, 2019, 6:00
कहहिं कबीर यह कलि है खोटी। जो रहे करवा सो निकरै टोटी।। एक छोटा सा पहाड़ी गांव था। ग्राम के सभी लोग शराब व मांस का सेवन करते थे। जो शराब नहीं पीता था, जो मांस नहीं खाता था उसे ग्राम सजा के रूप में ग्राम बाहर कर देते थे।... Read More

श्रद्धा भाव से किया जाना ही श्राद्ध है 

Updated on 20 September, 2019, 6:30
श्रद्धया इदं श्राद्धम, अर्थात जो श्रद्धा से किया जाये वही श्राद्ध है। श्राद्ध प्रथा वैदिक काल के बाद शुरू हुई और इसके मूल में इसी श्लोक की भावना है। उचित समय पर शास्त्र सम्मत विधि द्वारा पितरों के लिए श्रद्धा भाव से मन्त्रों के साथ जो दान-दक्षिणा आदि दिया जाय... Read More

काला कौआ श्राद्ध पक्ष का चहेता 

Updated on 20 September, 2019, 6:15
सूरज निकलते ही घर की मुंडेर पर बैठे कौवों की ‘काँव-काँव’ शुरू हो जाती हैं, जो सूरज ढलने तक जारी रहती हैं। शाम को कौए अपने बसेरे की तरफ उड़ जाते हैं। विष्णु पुराण में श्राद्धपक्ष में भक्ति और विनम्रता से यथाशक्ति भोजन कराने की बात कही गई है। कौए... Read More

सम्मान करो संपूर्णता से 

Updated on 20 September, 2019, 6:00
तुम किसी का सम्मान उसकी ईमानदारी, बुद्धिमत्ता, प्रेम और कार्य कुशलता जैसे सद्गुणों के लिए करते हो परंतु समय के साथ-साथ इन गुणों में परिवर्तन आता है। जिसके कारण तुम उनका सम्मान नहीं कर पाते। तुम केवल सद्गुणों का, महानता का सम्मान करते हो। मैं संपूर्णता से हर एक का... Read More

अपने पास न रखें ये वस्तुएं  

Updated on 19 September, 2019, 7:00
हम अपने पास जेब में कई चीजें रखते हैं जो वास्तु शास्त्र के हिसाब से नुकसानदेह होती हैं। हमारी आर्थिक स्थिति पर इसका विपरीत प्रभाव पडता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसी कई वस्तुएं हैं जिन्हें हमें अपने पास नहीं रखना चाहिये। वास्तु शास्त्र सकारात्मक एवं नकारात्मक ऊर्जा के बारे में... Read More

शिवजी को ब्रह्माकपाल में मिली थी, पाप से मुक्ति  

Updated on 19 September, 2019, 6:45
पिंडदान के लिए एक तीर्थ ऐसा भी है जहाँ पर किया पिंडदान गया से भी आठ गुणा फलदायी है, यही नहीं इसी तीर्थ स्थल पर भगवा‌न शिव को भी ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी।चारों धामों में प्रमुख बदरीनाथ के पास स्थित ब्रह्माकपाल के बारे में मान्यता है कि... Read More

शयनकक्ष में न रखें डरावनी तस्वीरें व वस्तुएं  

Updated on 19 September, 2019, 6:30
शयनकक्ष आपके घर की वो जगह होती है जहां आप दिन भर की थकान भुलाकर तरोताजा होते हैं। पर कई वस्तुएं रात के समय सिर के पास नहीं होनी चाहिये। वरना नींद में खलल के साथ आपकी रातें भी डरावनी हो जाएंगी।  पर्स या पैसे अक्‍सर देखने को मिलता है कि लोग... Read More

पितृपक्ष में पशु-पक्षियों को दें भोजन  

Updated on 19 September, 2019, 6:15
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार पितृपक्ष के 16 दिनों तक हमारे पूर्वज धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं। ये पितृ पशु पक्षियों के माध्यम से हमें देखने आते हैं। जिन जीवों तथा पशु पक्षियों के माध्यम से पितृ आहार ग्रहण करते हैं वो हैं - गाय, कुत्ता, कौवा... Read More

पिंडदान क्यों है जरूरी 

Updated on 19 September, 2019, 6:00
सनातन धर्म में 16 दिन पूर्वजों के लिए माने जाते हैं। मान्यता है कि अगर पितरों की आत्मा को मोक्ष नहीं मिला है, तो उनकी आत्मा भटकती रहती है। इससे उनकी संतानों के जीवन में भी कई बाधाएं आती हैं, इसलिए पितरों का पिंडदान जरूरी माना गया है। हिंदू धर्म में... Read More

इंद्र की सबसे सुंदर अप्सरा का ऐसे हुआ जन्म, किया यह कारनामा

Updated on 18 September, 2019, 6:30
इंद्र की अनेक अप्सराओं में एक अप्सरा का नाम तिलोत्तमा है। इनका नाम इनके अद्भुत सौंदर्य की वजह से है। इस अद्भुत सौंदर्य वाली अप्सरा के जन्म के पीछे बड़ी ही रोचक कथा है। पुराणों में मौजूद कथाओं में दो घटनाओं में जिक्र मिलता है कि क्यों तिलोत्तमा का जन्म... Read More

वस्तु या व्यक्ति की उपयोगिता ही उसे महत्वपूर्ण बनाती है

Updated on 18 September, 2019, 6:15
कविवर रहीम का एक दोहा है- ‘धनि रहीम जल पंक को लघु जिय पियत अघाय, उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाय।’ रहीम कहते हैं कि कीचड़ के ऊपर ठहरा या तैरता हुआ पानी धन्य है जिसे पीकर छोटे-छोटे जीव अर्थात कीड़े-मकोड़े तृप्त होकर प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन समुद्र... Read More

आत्मा का दिव्य भाव 

Updated on 18 September, 2019, 6:00
जो व्यक्ति दिव्य पद पर स्थित है, वह न किसी से ईष्या करता है और न किसी वस्तु के लिए लालायित रहता है। जब कोई जीव इस संसार में भौतिक शरीर से युक्त होकर रहता है, तो समझना चाहिए कि वह प्रकृति के तीन गुणों में से छूट जाता है।... Read More

श्राद्धपक्ष : पित्रों के तर्पण का दिवस

Updated on 17 September, 2019, 6:30
पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार श्राद्ध पर्व सितम्बर महीने में अश्विन मास (क्वॉर) के कृष्ण पक्ष से प्रारंभ होते है, हिन्दु मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पर्व में पितरों का तर्पण किया जाता है, श्राद्ध पक्ष में पुरखों को बैठाया जाता है, तथा पन्द्रह दिन तक उनका शोडषपचार पूजन व उनका भोग... Read More

वास्तु शास्त्र के जनक हैं विश्वकर्मा -17 सितम्बर विश्वकर्मा जयंती पर विशेष

Updated on 17 September, 2019, 6:15
विश्व के प्राचीनतम तकनीकी ग्रंथों का रचयिता भी विश्वकर्मा को ही माना गया है। इन ग्रंथों में न केवल भवन वास्तु विद्या, रथादि वाहनों के निर्माण, बल्कि विभिन्न रत्नों के प्रभाव व उपयोग आदि का भी विवरण है। देव शिल्पी के विश्वकर्मा प्रकाश को वास्तु तंत्र का अपूर्व ग्रंथ माना... Read More

प्रधानता आत्मा को 

Updated on 17 September, 2019, 6:00
मनुष्य सामान्यत: जो बाह्य में देखता, सुनता, समझता है वह यथार्थ ज्ञान नहीं होता। किन्तु भ्रमवश उसी को यथार्थ ज्ञान मान लेता है। अवास्तविक ज्ञान को ही ज्ञान समझकर और उसके अनुसार अपने कार्य करने केकारण मनुष्य अपने मूल उद्देश्य सुख-शान्ति की दिशा में अग्रसर न होकर विपरीत दिशा में... Read More

इन तस्वीरों को लगाकर बेडरूम में बढ़ा सकते हैं प्यार का अहसास

Updated on 16 September, 2019, 6:15
ज्यादातर घर में तस्वीरें और मूर्तियों को सजाकर रखा जाता है, इससे घर आर्कषक लगने लगता है। इसका मतलब होता है कि कोई आपके घर को देखे और तारीफ करे। तस्वीरें घर में लगाने से न सिर्फ घर की सुंदरता बढ़ती है बल्कि वास्तु के अनुसार, कुछ तस्वीरों को सुबह... Read More

 कैंची काटती है, सुई जोड़ती है 

Updated on 16 September, 2019, 6:00
कैंची काटती (तोड़ती) है और सुई जोड़ती है। यही कारण है कि तोड़ने वाली कैंची पैर के नीचे पड़ी रहती है और जोड़ने वाली सुई सिर पर स्थान पाती है। इसलिए मनुष्य का यही धर्म है कि इनसान को जोड़े न कि तोड़े। उन्होंने सास-बहू में एका होने का आह्वान... Read More

श्राद्ध-श्रद्धापूर्ण स्मरण : पितरों की पूजा को समर्पित

Updated on 15 September, 2019, 6:15
हिन्दी पंचांग के आश्विन माह के कृष्णपक्ष में श्राद्ध के सोलह दिन भारतीय समाज में पितरों की पूजा के लिए समर्पित हैं। अनन्त चतुर्दशी के दूसरे दिन प्रात:काल स्नान के पश्चात पितरों की पीठ की स्थापना की जाती है। यह पीठ परिवार का कोई भी पुरुष स्थापित कर सकता है।... Read More

जहाँ शांति है वही सुख 

Updated on 15 September, 2019, 6:00
यदि हमारे पास दुनिया का पूरा वैभव और सुख-साधन उपलब्ध है परंतु शांति नहीं है तो हम भी आम आदमी की तरह ही हैं। संसार में मनुष्यों द्वारा जितने भी कार्य अथवा उद्यम किए जा रहे हैं सबका एक ही उद्देश्य है 'शांति'। सबसे पहले तो हमें ये जान लेना... Read More

पितृ पक्ष 2019 : पितृ दोष दूर करने का सबसे सही समय, 4 सरल उपाय करें इन 16 दिनों में

Updated on 14 September, 2019, 6:45
 अस दौरन पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। मान्यता है कि हमारो पूर्वज सूक्ष्म रूप में हम तक पहुंचते हैं। अगर किसी की कुंडली में पितृदोष हो तो यह सबसे उत्तम समय है उससे मुक्ति का। अनिष्टकारी प्रभावों से बचने के लिए श्राद्ध के 16 दिनों में 4 सरल... Read More

कालसर्प दोष क्या है? इसके भयानक लक्षण और बचाव, जानिए लाल किताब के उपाय

Updated on 14 September, 2019, 6:30
कुछ विद्वान मानते हैं कि काल सर्प दोष नहीं होता और कुछ इसे मानते हैं। दरअसल राहु और केतु के कारण ही काल सर्प दोष होता है। इसलिए लाल किताब में राहु और केतु के अचूक उपाय बताए गए हैं। आओ जानते हैं काल सर्प दोष के बारे में संक्षिप्त... Read More

जीवन एक क्रिकेट मैच 

Updated on 14 September, 2019, 6:00
प्रांतिकारी संत तरुणसागरजी ने क्रिकेट की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन एक क्रिकेट है, धरती की विराट पिच पर समय बॉलिंग कर रहा है। शरीर बल्लेबाज है, परमात्मा के इस आयोजन पर अम्पायर धर्मराज हैं। बीमारियाँ फील्डिंग कर रही हैं, विकेटकीपर यमराज हैं, प्राण हमारा विकेट है, जीवन एक... Read More

पार्वण श्राद्ध 

Updated on 13 September, 2019, 6:15
श्राद्ध क्यों : सनातन हिन्दू धर्मावलम्बियों ने पूर्व पुरूषों के प्रति आभार, आदर और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अपने धर्म शास्त्रों के निर्देशानुसार जिस विधि को अपनाया है। उसका नाम है श्राद्ध। श्राद्ध शब्द की उत्पत्ति श्रद्धा से हुई है। पुलस्त्य स्मृति वायु पुराण श्राद्ध तत्व आदि ग्रंथों में... Read More