Tuesday, 17 September 2019, 10:47 PM

विविध

यहां रेस्टोरेंट में परोसा जाता है सांपों का मांस, वाइन में सोडा नहीं मिलाते हैं खून

Updated on 12 September, 2018, 10:30
नई दिल्ली : अगर आपसे कोई पूछे कि रेस्टोरेंट में जाकर आप क्या खाना पसंद करेंगे तो शायद आपका जवाब होगा चिकन, मटन और और कोई पॉपुलर नॉनवेज डिश. लेकिन शायद ही आप सांपों के मांस की कल्पना कर पाएं. लेकिन एक देश ऐसा भी है जहां के लग्जरी रेस्टोरेंट में... Read More

चिता जली तो हो गई जिंदा, अस्पताल में इलाज के दौरान फिर मौत के आगोश में समाई

Updated on 10 September, 2018, 10:26
झारखंड में चतरा के सोखा में रात अमर चौधरी की पुत्री क्रांति कुमारी (16) को नींद में सांप ने डंस लिया। विष के प्रभाव में वह बेहोश हो गई। सुबह लड़की के नहीं उठने पर घर वाले परेशान हो गए। उसे उठाने का प्रयास किया, तभी गले में सांप के... Read More

OMG! एंटीबायोटिक लेने से महिला की जीभ पर उग गए बाल, फिर...

Updated on 8 September, 2018, 11:45
नई दिल्ली : आजकल एंटीबायोटिक्स के उपयोग धड़ल्ले से हो रहे है. स्वस्थ हो या फिर बीमार खुद को फिट रखने के लिए लोग एंटीबायोटिक्स का यूज कर रहे हैं. एंटीबायोटिक्स लेते हुए हम अक्सर इसके फायदों को तो पढ़ते हैं, लेकिन इसके नुकसानों को नजरअंदाज करते हैं. एंटीबायोटिक्स के... Read More

सिंह और बूढ़े शशक की कहानी

Updated on 4 September, 2018, 14:28
मंदर नामक पर्वत पर दुदार्ंत नामक एक सिंह रहता था और वह सदा पशुओं का वध करता रहता था। तब सब पशुओं ने मिल कर उस सिंह से विनती की, सिंह एक साथ बहुत से पशुओं की क्यों हत्या करते हो ? जो प्रसन्न हो तो हम ही तुम्हारे भोजन... Read More

चुनरी हरी उढानी है

Updated on 19 August, 2018, 7:00
विवेक रंजन श्रीवास्तव रोप पोस कर पौधे, अनगिन हरे भरे  अपनी जमीं को चूनर, हरी ओढ़ानी है होंगे संकल्प सारे हमारे फलीभूत हम प्रयास तो करें, सफलता आनी है  जब खरीदा, इक सिलेंडर आक्सीजन  तब  वृक्षों की कीमत उसने जानी है  जहाँ अंकुरण बीजों का है  संभव  ब्रम्हाण्ड में सारे , धरा यही वरदानी है  घाटियां गहराईयां , ऊँचाईयां... Read More

मकान मालकिन का सवाल था, तुम ऐसा-वैसा काम तो नहीं करती हो?

Updated on 18 August, 2018, 15:30
ये कहानी लखनऊ से दिल्ली पढ़ाई करने आई एक लड़की की है. जो पढ़ाई के दौरान तो हॉस्टल में रही, लेकिन नौकरी लगने के बाद किराए पर कमरा बेहद मुश्किलों से मिला. जब पहली दफा कमरा ढूंढने गई तो मकान मालकिन ने 'तुम ऐसा वैसा काम तो नहीं करती हो'... Read More

उस डेढ़ पसली में अब वो बात कहां

Updated on 13 November, 2017, 12:12
आदमी जब फिसलता है तो खुद के शरीर का बोझ ही उसे पटक देता है। अखाड़ों में बड़े बड़े सूरमाओं को जो देंह पछाड़ देती है अटके वक्त में वही स्वयं की दुश्मन बन जाती है। कल तक जो खूबियां थी आज वही मजाक बना देती हैं। सार्वजनिक जीवन में... Read More

संसार की कोई शक्ति न आपके पुण्य बढ़ा सकती और न ही पाप घटा सकती

Updated on 11 November, 2017, 12:42
भोपाल। आपका भविष्य आपके आचरण और कर्म पर निर्भर है। यदि आपने अच्छे काम किए हैं तो कोई भी आपके पुण्यों की  वृद्धि से नहीं रोक सकता, यदि गलतियां हुईं हैं तो कोई उन्हें माफ नहीं करा पाएगा। किसी की गलती माफ नहीं होती उसे प्रायशिचत्त करना ही पड़ेगा,दंड भोगना... Read More

"भविष्य सुरक्षित,वर्तमान तनावग्रस्त "

Updated on 11 November, 2017, 12:41
व्यस्तता भरे दिनों में कार्यों का निष्पादन कर पाना मुश्किल जरूर होता है परन्तु कार्य पूर्ण होने के बाद की अनुभूति बहुत ही सुखद होती है। यकीन न हो तो स्वयं के बारे में सोच कर महसूस कर सकते है कि आप अपने कार्यों का सफलतापूर्वक निष्पादन के पश्चात जब... Read More

तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना

Updated on 7 November, 2017, 13:21
दो मसले मुझे हमेशा बहुत परेशान करते हैं। एक डाक्टरों की पर्ची और दूसरी बड़ी अदालतों के फैसलों की इबारत। मैं अँग्रेजी माध्यम से विग्यान का स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधिधारी हूँ जब मैं असहज और परेशान हो जाता हूँ तो उन लोगों की क्या कहिए जिन्हें पढाई के समय एबीसीडी... Read More

फिर भी जलती रहेगी लोहिया के विचारों की मशाल

Updated on 13 October, 2017, 12:55
राजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर चूर कर देता है। काँग्रेसमुक्त भारत की सोच डाक्टर राममनोहर लोहिया की थी। आज देश लगभग कांग्रेस मुक्त है पर लोहिया मुखपृष्ठ पर नहीं हैं। 12 अक्टूबर को लोहिया जी... Read More

दूसरी आजादी के मुक्तिदाताः जेपी और नानाजी

Updated on 9 October, 2017, 13:54
अक्टूबर का महीना बड़े महत्व का है। पावन,मनभावन और आराधन का। दशहरे से शुरू हुआ, देवप्रबोधिनी तक चलेगा। भगवान मुहूर्त देखकर ही विभूतियों को धरती पर भेजता है। 2 अक्टूबर को गांधीजी,शास्त्रीजी की जयंती थी। 11अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती है। चारों के बीच ही परस्पर... Read More

विषमता का बोझा और कबतक ढोएगी रेल

Updated on 6 October, 2017, 12:11
राज्यपाल या मुख्यमंत्री रेल से चलें आज कोई इसकी कल्पना नहीं कर सकता। इस दर्जे के महापुरुषों की यात्राएं भी खबर बनती हैं। पंद्रह साल पहले एक ऐसी ही घटना खबर बनी। हुआ यह कि अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच पटरी नहीं बैठती थी। वजह राज्यपाल केंद्र... Read More

अपने लिये नहीं परिजन के लिये करें सुरक्षित ड्राइव

Updated on 5 September, 2017, 12:54
रोजमर्रा की भाग दौड़ भरी जिन्दगी में जीने के लिये लोगों ने रफ्तार का सहारा ले रखा है। इसमें वे यह भूल जाते हैं कि हमारे पीछे भी कोई है। हम बात कर रहे हैं उन लोगों की जो तेज गति से वाहन चलाकर काल के गाल में समा जाते... Read More

रूपए की इज्जत का सवाल है बाबा

Updated on 2 September, 2017, 12:16
जब जब रुपया धड़ाम से नीचे गिरता है तो अपने देश के स्वयंभू अर्थशास्त्रियों के बीच हाहाकार मच जाता है। तेजडिय़ों, मंदडिय़ों के चेहरे सूखने लगते हैं। शेयर बाजार में सेनसेक्स और निफ्टीे हार्टअटैक नापने की मशीन के कांटे की तरह ऊपर-नीचे होने लगते हैं। हाल फिलहाल ऐसा ही कुछ... Read More

अफवाहों का माध्यम बनता सोशल मीडिया

Updated on 13 August, 2017, 12:05
अनिल कुमार पाण्डेय वर्तमान दौर सूचनाओं के त्वरित प्रवाह का है। सूचनाएं बिजली की चलपता से एक स्थान से अन्यत्र हवाओं में तैरती हुई हमारे माध्यमों के मार्फत सभी तक पहुंच रही हैं। सूचना समर के इस दौर में अफवाहों का तंत्र भी इसके समानांतर गतिशील है। अफवाहें कब सूचनाओं का... Read More

वक्त बहुत गुजारा मैनें...

Updated on 20 April, 2017, 23:45
वक्त बहुत गुजारा मैनें, खो दिया वो समय कुछ ही क्षण मे| वक्त का कैहर देखो  मुझपर क्षण क्षण भारी सा है शहर में | खुली किताब न ज़िंदगी की पृष्ठ रंग देखा हर क्षण, वक्त भी सलाह करता नही किसी से बदल गया एक क्षण में | मुठ्ठी मे बंदकर समय रखा था,... Read More

किसी को ये लग सकता है कि दुनिया केवल जानवरों के लिए है

Updated on 6 April, 2017, 13:58
हम च्जीवन की लयज् की बातें करते हैं और कई बार अफसोस जताते हैं कि हमारे समय में ये खो चुकी है। जीवन की यही लय पूरे विश्व में कविता के बीज रोपती है। अगर ये लय न होती तो कविता न होती। कविता में अक्सर जीवन की ये लय... Read More

मुल्ला का प्रवचन

Updated on 1 March, 2017, 13:49
एक बार मुल्ला नसरुदीन को प्रवचन देने के लिए आमंत्रित किया गया . मुल्ला समय से पहुंचे और स्टेज पर चढ़ गए , “ क्या आप जानते हैं मैं क्या बताने वाला हूँ ? मुल्ला ने पूछा . “नहीं ” बैठे हुए लोगों ने जवाब दिया . यह सुन मुल्ला नाराज़ हो... Read More

थोड़ी सी बुद्धिमानी कर देती है हर समस्या का हल, आप में है ये हुनर

Updated on 20 February, 2017, 9:11
मध्य पूर्वी देश से एक ईरानी शेख व्यापारी महाराज कृष्णदेव राय का अतिथि बन कर आता है। महाराज अपने अतिथि का सत्कार बड़े भव्य तरीके से करते हैं और उसके अच्छे खाने व रहने का प्रबंध करते हैं तथा साथ ही कई अन्य सुविधाएं भी प्रदान करते हैं। एक दिन भोजन... Read More

बर्थडे स्पेशलः पाकिस्तान में पैदा हुए भगत सिंह की 10 अनकही बातें

Updated on 28 September, 2016, 13:40
शहीद-ए-आजम भगत सिंह का आज 110वां जन्मदिवस है। इस मौके पर आइए आपको बताते हैं, उनके जीवन से जुड़ी 10 अनकहीं बातें। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले (अब पाकिस्‍तान) के बंगा गांव में एक सिख परिवार में हुआ था। हालांकि... Read More

ये सितारों से भरा आसमा इतना खमोश क्यों है,

Updated on 27 August, 2016, 20:37
ये सितारों से भरा आसमा इतना खमोश क्यों है, ये चाँद सा चेहरा इतना खमोश क्यों है । तेरी चँचलता दिखती है मुझे तेरी आँखों मे, तेरी नादानियाँ दिखती है मुझे तेरी बातों में। तू हँसती है खिलखिला कर, लेकिन तेरा मन इतना खमोश क्यों है। क्या हुनर है तुझमें खुद का गम छुपाकर औरों... Read More

"हाॅर्न धीरे बजाओ मेरा 'देश' सो रहा है"...!!!

Updated on 9 August, 2016, 10:29
एक ट्रक के पीछे लिखी ये पंक्ति झकझोर गई...!! "हाॅर्न धीरे बजाओ मेरा 'देश' सो रहा है"...!!! उस पर एक कविता इस प्रकार है कि..... 'अँग्रेजों' के जुल्म सितम से...   फूट फूटकर 'रोया' है...!! 'धीरे' हाॅर्न बजा रे पगले....     'देश' हमारा सोया है...!! आजादी संग 'चैन' मिला है... 'पूरी' नींद से सोने दे...!! जगह मिले वहाँ 'साइड' ले ले... हो 'दुर्घटना'... Read More

शिकायत करूँ तुझसे या तेरा शुक्रिया करूँ

Updated on 8 July, 2016, 18:51
शिकायत करूँ तुझसे या तेरा शुक्रिया करूँ। कभी आसमां दिखा देता है,और कभी जमी पर गिरा देता है। अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है। कभी छमछम करती बारिश तन को भिगा जाती है, तो कभी चिलचिलाती धूप से मन को जला देता है। अकसर ये तेरी इनायत का... Read More

तो एक पतले धागे जितनी है जिंदगी की सच्‍चाई

Updated on 6 July, 2016, 21:45
एक सम्राट अपने वजीर पर नाराज हो गया। और उसने वजीर को आकाश-छूती एक मीनार में कैद कर दिया। वहां से कूद कर भागने का कोई उपाय न था। कूद कर भागता तो प्राण ही खो जाते। लेकिन वजीर जब कैद किया जा रहा था, तब उसने अपनी पत्नी के... Read More

इकलौता अंग्रेज जिसने रानी लक्ष्मीबाई को देखा...हैरान होकर बोला कि…!

Updated on 5 June, 2016, 11:24
भारतीय परंपराएं थीं या इत्तेफाक कि रानी लक्ष्मीबाई को रूबरू देखने का सौभाग्य बस एक गोरे आदमी को मिला। अंग्रेजों के खिलाफ जिंदगी भर जंग लड़ने वालीं और जंग के मैदान में ही लड़ते-लड़ते जान देने वालीं झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को बस एक अंग्रेज ने देखा था। ये अंग्रेज... Read More

जब गांधी जी की हो गई थी बोलती बंद, कांपने लगे थे हाथ-पैर...

Updated on 21 May, 2016, 17:24
बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि अपने शुरुआती समय में राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी बेहद शर्मीले स्‍वभाव के थे, वे न केवल दूसरों से बात करने में बल्‍कि कुछ कहने, आने-जाने में भी संकोच करते थे। गांधी जी का अध्‍ययन काफी था और वे कई किताबों के जरिये लगातार नित्... Read More

इस भारतीय योद्धा के नाम से सपने में भी कांपता था अकबर....

Updated on 11 May, 2016, 1:45
यूं तो हिंदुस्‍तान की सरजमीं पर एक से एक जाबांज योद्धा, और रणबांकुरे हुए, जिन्‍होंने अपनी तलवार के बल पर बाहरी आक्रांताओं, विदेशी शत्रुओं से अपनी मातृभूमि की रक्षा की। मुगलों सहित विदेशियों के सत्‍ता विस्‍तार को रोकने में अपनी वीरता और हिम्‍मत का बेहद साहसी परिचय दिया। फिर चाहे... Read More

काशी के चंदन में है मदीने की वो खुशबू।

Updated on 6 October, 2015, 14:13
काशी के चंदन में है मदीने की वो खुशबू। दुनिया की हर रौनक को मैं नाम तुम्हारे कर दूं। वो मुट्ठी भर उम्मीदें वो गहरे गम के साए। वो छितरी धूप सुनहरी और लंबी-लंबी राहें। लब पर नाम हो रब का जब सफर खत्म हो जाए। तेरी मिट्टी पाक मदीने तेरा कण-कण पावन काशी। जन्नत को मैं क्या चाहूं बस नाम तुम्हारा कह... Read More

शपथ

Updated on 20 May, 2015, 9:05
जिसकी खातिर उसने सपने देखे, कमरे को घर बनाया, उसी ने ऐसा धोखा दिया कि सीने में ज्वालामुखी लिए वह बरसों तक उसकी तलाश में भटकता रहा। उस बेवफा को मार देना चाहता था वह। मगर एक दिन वह सामने आई तो चाह कर भी उसे न मार सका...। नया घर... Read More