Monday, 18 November 2019, 9:43 AM

जीवन मंत्र

 आहार का असर 

Updated on 18 November, 2019, 6:00
आदमी बीमार हो गया। रक्त चढ़ाने की जरूरत हुई। डॉक्टर रक्त चढ़ाता है, तो पहले वह ग्रुप मिलाता है। किस ग्रुप का रक्त है? ठीक मिलेगा या नहीं? सेठ को रक्त चढ़ाना था- एक कंजूस आदमी का रक्त ठीक मिला, चढ़ाया गया। सेठ को पता चला कि उसको कंजूस का... Read More

समता की अनुभूति 

Updated on 17 November, 2019, 6:00
मनोबल के विकास का दूसरा सूत्र बताया गया है- स्व दर्शन समता का दर्शन या परमात्मा का दर्शन। प्रांस की यूनिवर्सिटी का एक प्रोफेसर अहंकार में आकर बोला, 'मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ  आदमी हूं।' किसी ने पूछ लिया-यह कैसे? उसने कहा, 'प्रांस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है। पेरिस प्रांस का... Read More

चैतन्यता जरूरी 

Updated on 16 November, 2019, 6:00
स्मृति और विस्मृति दोनों संतुलन अपेक्षित हैं। कुछेक व्यक्तियों में विस्मृति की बड़ी मात्रा होती है। वह हमारी चेतना की स्थिति को बहुत स्पष्ट करता है। एक व्यंग्य है। दो बहनें मिलीं। एक स्त्री ने कहा, मेरा पति बहुत भुलक्कड़ है। एक दिन बाजार में गया सब्जी लाने के लिए।... Read More

उपाय भी ठीक से हो 

Updated on 15 November, 2019, 6:00
एक सास ने बहू से कहा, 'बहूरानी! मैं अभी बाहर जा रही हूं। एक बात का ध्यान रहे, घर में अंधेरा न घुसने पाए। बहू बहुत भोली थी। सास चली गई, सांझ होने को आई। उसने सोचा कि अंधेरा कहीं घुस न जाए, सारे दरवाजे बंद कर दिए। सब खिड़कियां... Read More

सफलता का मार्ग 

Updated on 14 November, 2019, 6:00
संग्रह की वृत्ति बहिमरुखता का लक्षण है। साधक क्षणजीवी होता है। अतीत की स्मृति और भविष्य की चिंता वह करता है जो आत्मस्थ नहीं होता। वर्तमान में जीना आत्मस्थता का प्रतीक है। एक साधक कल की जरूरत को ध्यान में रखकर संग्रह नहीं करता, पर एक व्यवसायी सात पीढ़ियों के... Read More

संवेदनशील और सबल बनो 

Updated on 13 November, 2019, 6:00
सदाचार का तब तक पालन किए जाओ जब तक यह तुम्हारा स्वभाव न बन जाए। मित्रता, दया और ध्यान का अभ्यास जारी रखो। जब तक यह न समझ जाओ कि यह तुम्हारा स्वभाव है। जब कार्य स्वभावत: किया जाता है,तब तुम फल की लालसा नहीं रखते हो। सहजता से बस... Read More

मनोबल कम न हो 

Updated on 12 November, 2019, 6:00
जीवन की जितनी अनिवार्य आवश्यकताएं हैं, वे वास्तविक समस्याएं हैं। कुछ समस्याएं हमारी काल्पनिक भी हैं। काल्पनिक समस्याएं भी कम भयंकर नहीं होती। वास्तविक समस्याएं बहुत थोड़ी हैं, गिनी-चुनी। किन्तु काल्पनिक समस्याओं का कहीं अंत नहीं है। इतनी जटिल समस्याएं जो प्रतिदिन हमारे सामने उभरती हैं। किस प्रकार काल्पनिक समस्याएं... Read More

पूर्वाग्रह न पालें 

Updated on 11 November, 2019, 6:00
पुत्र वयस्क हो चुका था। उसने एक दिन पिता से कहा, 'पिताजी! आज से मैं आपके साथ भोजन नहीं करूंगा।' यह कथन तनाव पैदा करने वाला था। पर पिता समझदार था। उसने तत्काल कहा, 'बेटा! कोई बात नहीं है। इतने दिनों तक तुम मेरे साथ भोजन करते रहे तो आज... Read More

 निष्ठावान बने रहें 

Updated on 10 November, 2019, 6:00
एक किसान शहर में आया। गहनों की दुकान पर गया। गहने खरीदे, सोने के गहने, चमकदार। दुकानदार ने मूल्य मांगा। किसान ने कहा, मेरे पास मूल्य नहीं है, रूपए नहीं हैं। घी का भरा हुआ घड़ा है। आप इसे ले लें और गहने मुझे दें। सौदा तय हो गया। दुकानदार... Read More

विचारों की तरंगें

Updated on 9 November, 2019, 6:00
राजा की सवारी निकल रही थी। सर्वत्र जय-जयकार हो रही थी। सवारी बाजार के मध्य से गुजर रही थी। राजा की दृष्टि एक व्यापारी पर पड़ी। वह चन्दन का व्यापार करता था। राजा ने व्यापारी को देखा। मन में घृणा और ग्लानि उभर आई। उसने मन ही मन सोचा, 'यह... Read More

अज्ञान का आवरण

Updated on 8 November, 2019, 6:00
गुरू के पास डंडा था। उस डंडे में विशेषता थी कि उसे जिधर घुमाओ, उधर उस व्यक्ति की सारी खामियां दिखने लग जाएं। गुरू ने शिष्य को डंडा दे दिया। कोई भी आता, शिष्य डंडा उधर कर देता। सब कुरूप-ही-कुरूप सामने दीखते। अब भीतर में कौन कुरूप नहीं है? हर... Read More

सहन करना सीखें

Updated on 7 November, 2019, 6:00
व्यक्ति स्वयं ही बेचैनी का जीवन जीता है और अकारण ही जीवन में अनेक कष्टों को आमंत्रित कर लेता है। एक आदमी था। वह सदा प्रसन्न रहता था। एक दिन उसको उदास देखकर मित्र ने पूछा, मित्र! तुम सदा प्रसन्न रहते थे। तुम्हारी सारी अनुकूलताएं थीं। पर आज तुम बहुत... Read More

प्रार्थना की शक्ति का महत्व... 

Updated on 6 November, 2019, 6:00
मनुष्य का जीवन उसकी शारीरिक एवं प्राणिक सत्ता में नहीं, अपितु उसकी मानसिक एवं आध्यात्मिक सत्ता में भी आकांक्षाओं तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और कामनाओं का है। जब उसे ज्ञान होता है कि एक महत्तर शक्ति संसार को संचालित कर रही है, तब वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति... Read More

जीवन का संघर्ष

Updated on 5 November, 2019, 6:00
एक दिन एक व्यक्ति बहुत परेशान लग रहा था। मित्र ने पूछा- क्या बात है? आज इतने परेशान क्यों हो?   उसने कहा- मैं बहुत मुसीबत में फंस गया हूं।   मित्र बोला- तुम्हारी क्या मुसीबत हो सकती है? तुम्हारे दोनों लड़के संपन्न हैं। खूब धन कमा रहे हैं। तुम्हें किस बात... Read More

गहराई में जाएं

Updated on 4 November, 2019, 6:00
गुरू के पास तीन शिष्य आए, बोले, गुरूदेव! हम साधना करना चाहते हैं। कोई साधना का सूत्र बताएं। गुरू ने सोचा, साधना का सूत्र बताने से पहले परीक्षा कर ली जाए। गुरू ने तीनों से एक प्रश्न पूछा, आंख और कान में कितना अंतर है। पहला व्यक्ति बोला, चार अंगुल... Read More

कोई भी परिस्थिति हो, ये काम कभी बंद ना करें..

Updated on 3 November, 2019, 6:00
अपने विचारों का मूल्यांकन करना कभी भी बंद न करें, क्योंकि विचारों का प्रवाह अनवरत और कभी-कभी अत्यधिक भी हो जाता है। हर नया विचार पुराने को चुनौती देता है। यहीं से भ्रम भी पैदा होता है और कभी-कभी अधिक विचार आने से निर्णय भी गलत हो जाते हैं। रावण... Read More

विश्वास की ताकत

Updated on 2 November, 2019, 6:00
एक अंग्रेज अफसर अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ जहाज में सवार होकर सफर पर निकला। रास्ते में समुद्र में जोर का तूफान आया। मुसाफिर घबरा उठे। पर वह अंग्रेज अफसर जरा भी नहीं घबराया। उसकी पत्नी भी व्याकुल हो गई थी। उसने अपने पति से पूछा-इतना खतरनाक तूफान आया है।... Read More

व्यक्ति-निर्माण समाज पर निर्भर 

Updated on 1 November, 2019, 6:00
व्यक्ति का निर्माण केवल उसी पर नहीं, बहुत कुछ अंशों में समाज पर निर्भर है।इसलिए उसे अपने निर्माण को समाज के निर्माण में देखना है। सफलता का पहला सूत्र है- मूल्यों का परिवर्तन। समाज का निर्माण मूल्यों के परिवर्तन से ही होता है। स्वार्थ और संग्रह, ये दोनों मूल्य जब... Read More

मरने के बाद कहां जाता है इंसान

Updated on 31 October, 2019, 6:00
सभी धर्मों में पुनर्जन्म की बात कही गयी है, यानी एक शरीर को छोड़ने के बाद इंसान दूसरे शरीर में प्रवेश करता है। लेकिन मृत्यु के बाद से पुनर्जन्म लेने तक जीव कहां रहती है यह एक बड़ा सवाल है। भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में कहा है कि... Read More

खुद तय करें कि अगले जन्म में क्या बनेंगे 

Updated on 30 October, 2019, 6:00
अगले जन्म में आप धनवान बनेंगे या गरीब, एक्टर बनेंगे या डॉक्टर यह सब आप पर निर्भर है। हो सकता है कि आप इस पर यकीन न करें लेकिन सच यही है। इसका प्रमाण है श्रीमद्भगवत् गीता। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि आत्मा अमर है। एक शरीर... Read More

सुखी रहना है तो ईश्वर से शिकायत न करें 

Updated on 29 October, 2019, 6:00
इंसानों की एक सामान्य आदत है कि तकलीफ में वह भगवान को याद करता है और शिकायत भी करता है कि यह दिन उसे क्यूं देखने पड़ रहे हैं। अपने बुरे दिन के लिए इंसान सबसे ज्यादा भगवान को कोसता है। जब भगवान को कोसने के बाद भी समस्या से... Read More

स्वस्थ समाज के लिए करें आत्म जागरण 

Updated on 27 October, 2019, 6:00
पिछले कुछ समय से अध्यात्म के क्षेत्र में बाजारवाद का प्रभाव बढ़ा है। इसी वजह से अध्यात्म के क्षेत्र में भी अवमूल्यन हुआ है। अत: स्वस्थ समाज के लिए आत्म जागरण जरूरी है। जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद के अनुसार अध्यात्म के क्षेत्र में बाजारवाद ने प्रभाव डाला है और यह... Read More

ईश्वर की कृपा बुद्धि से ही प्राप्त होती है 

Updated on 25 October, 2019, 6:00
योग में आसन, प्राणायाम, मुद्रा और आहार-विहार आदि पर तो बहुत शोध हुए हैं, अब ध्यान और मुद्रा की बारी है। इस विधा के अनुसार शांत मस्तिष्क ऊर्जा का केंद्र है तो निर्मल मन शांति और स्थिरता का। शास्त्रों  में इन केंद्रों की उपमा ब्रह्मलोक और क्षीर सागर से दी... Read More

 अहंकार त्यागने वाले ही महापुरूष होते हैं 

Updated on 23 October, 2019, 6:00
बहुत से लोग दिन-रात प्रयास करते हैं कि उन्हें किसी तरह उच्च पद मिल जाए। खूब सारा पैसा हो और आराम की जिन्दगी जियें। जब ये सब प्राप्त हो जाता है तो इसे ईश्वर की कृपा मानने की बजाय अपनी काबिलियत और धन पर इतराने लगते हैं। जबकि संसार में... Read More

भगवान का सबसे प्रिय आहार अहंकार

Updated on 21 October, 2019, 6:30
अहंकार शब्द बना है अहं से, जिसका अर्थ है 'मैं'। जब व्यक्ति में यह भावना आ जाती है कि 'जो हूं सो मैं, मुझसे बड़ा कोई दूसरा नहीं है' तभी व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है। द्वापर युग में सहस्रबाहु नाम का राजा हुआ। इसे बल का इतना अभिमान... Read More

 जीवन का अर्थ बताती है अर्थी 

Updated on 20 October, 2019, 6:00
जीवन भर व्यक्ति इसी सोच में उलझा रहता है कि उसका परिवार है, बीबी बच्चे हैं। इनके लिए धन जुटाने और सुख-सुविधाओं के इंतजाम में हर वह काम करने के लिए तैयार रहता है जिससे अधिक से अधिक धन और वैभव अर्जित कर सके। अपने स्वार्थ के लिए व्यक्ति दूसरों... Read More

दान और परोपकार से घटता नहीं है धन 

Updated on 19 October, 2019, 6:00
सभी धर्मों में कहा गया है कि दान करो। दान करने से धन घटता नहीं है बल्कि आपका धन बढ़ता है। लेकिन समस्या यह है कि लोग धन बढ़ने का तात्पर्य यह समझते हैं कि आज आप सौ रूपये कमाते हैं तो कल हजार रूपये कमाने लगेंगे। शास्त्रों में मुद्रा... Read More

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

Updated on 16 October, 2019, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... Read More

 द्वंद्व के बीच शांति की खोज  

Updated on 15 October, 2019, 6:00
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ।   जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... Read More

श्रद्धा के मुताबिक पूजा

Updated on 14 October, 2019, 6:00
हरेक व्यक्ति में चाहे वह जैसा भी हो, एक विशेष प्रकार की श्रद्धा पाई जाती है। लेकिन उसके द्वारा अर्जित स्वभाव के अनुसार उनकी श्रद्धा उत्तम (सतोगुणी), राजस (रजोगुणी) अथवा तामसी कहलाती है। अपनी श्रद्धा के अनुसार ही वह कतिपय लोगों से संगति करता है। अब वास्तविक तथ्य तो यह... Read More