Friday, 19 July 2019, 3:33 AM

विविध

दुश्मन के भी दोस्त बनो

Updated on 9 April, 2015, 11:55
बहुत पहले की बात है। एक गांव था राजनगर। वहां पर करण नाम का एक लड़का रहता था। वह लड़का स्वभाव का बहुत अच्छा था। पढ़ाई में भी होशियार था। वह बहुत आज्ञाकारी और अपने मां-बाप का कहना मानता था। स्कूल में वह ज्यादातर बच्चों की तुलना में होशियार था।... Read More

नसीहत

Updated on 2 February, 2015, 13:17
पड़ोस के घर में एक परिवार रहने आया था। उसमें दादा जी की उम्र के एक व्यक्ति और उनकी पत्नी रहत थीं। वह दादी जी लंगड़ा कर चलते थे और कड़क स्वभाव के थे। वह अपने साथ बहुत से गमले लाए थे, जिनमें रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे थे। वह अपने... Read More

मिल गई परी

Updated on 28 January, 2015, 13:38
एक लकड़हारा अपनी पत्नी और नेत्रहीन मां के साथ एक जंगल के पास झोपड़ी बनाकर रहता था। उसकी कोई संतान नहीं थी और वह काफी गरीब भी था। हालांकि वो कभी भी किसी भी चीज के लिए भगवान से शिकायत नहीं करता था। वह लकड़ी काटकर और उन्हें बाजार में... Read More

दो दोस्तों की अनसुनी कहानी

Updated on 6 January, 2015, 9:30
एक बार दो मित्र साथ-साथ एक रेगिस्तान में चले जा रहे थे। रास्ते में दोनों में कुछ कहासुनी हो गई। बहसबाजी में बात इतनी बढ़ गई की उनमे से एक मित्र ने दूसरे के गाल पर जोर से तमाचा मार दिया। जिस मित्र को तमाचा पड़ा उसे दुःख तो बहुत हुआ... Read More

कंबो शहर की यात्रा

Updated on 3 January, 2015, 12:52
एक दिन कौमी कौआ काफी दिनों बाद अपने गांव आया। गांव में सभी पक्षियों ने उसका खूब स्वागत किया। कौमी में एक आदत थी कि जब भी वह गांव जाता तो अपने सभी दोस्तों के लिए कुछ न कुछ खाने की चीज साथ लेकर जरूर जाता। इस बार वह पिज्जा... Read More

साहसी सौरभ

Updated on 15 December, 2014, 13:36
गांव से बाईं तरफ एक संकरी पगडंडी जंगल की ओर जाती थी। उस पगडंडी पर पचास कदम आगे जाकर दाहिनी ओर अगर झाडियों को हटाकर आगे बढ़े तो एक बड़ा सा आम का पेड़ था। मौसम आने पर वह सदा बड़े-बड़े पीले रसीले आमों से लदा रहता था। यह आम... Read More

मेरे पहले मनीऑर्डर की कहानी

Updated on 11 December, 2014, 10:00
यह बहुत पुरानी बात नहीं है जब मैं 24 साल का एक नौजवान था। मेरे पास नेचुरोपैथी अस्पताल से पास किए कोर्स का प्रमाण पत्र, किताबों से मुंह तक भरा खाकी रंग का एक थैला, आधी भरी गुल्लक और दो आंखों में अनगिनत सपने थे। मैं जब बहुत छोटा था... Read More

सुधर गया सुब्बा

Updated on 25 November, 2014, 12:45
एक बार फारस देश से घोड़ों का एक व्यापारी कुछ बेहद उत्तम नस्ल के घोड़े लेकर विजय नगर आया। सभी जानते थे कि महाराज कृष्णदेव राय घोड़ों के उत्तम पारखी हैं। उनके अस्तबल में चुनी हुई नस्लों के उत्तम घोड़े थे। महाराज ने फारस के व्यापारी द्वारा लाए गए घोड़ों... Read More

लालची बूढ़ा सारस

Updated on 15 November, 2014, 11:49
एक बूढ़ा सारस नदी किनारे रहता था। वह सारस इतना बूढ़ा हो चला था कि भरपेट भोजन जुटा पाना भी उसके लिए मुश्किल हो गया था। मछलियां अगल-बगल से तैरकर निकल जातीं, लेकिन कमजोर होने के कारण वह उन्हें पकड़ नहीं पाता था। एक दिन वह बहुत भूखा था, क्योंकि पिछले... Read More

पिंगू

Updated on 9 October, 2014, 12:17
पिहले अंतरिक्ष के मम्मी-पापा जब दफ्तर जाते थे, तो वह दादी का हाथ पकड़े, कभी दूध पीते, तो कभी खेलते-खेलते उनको बाय-बाय कहता था। फिर कहता था, ‘सी यू इन द ईवनिंग।’ उसे ऐसा करते देख मम्मी-पापा के साथ दादी भी बहुत खुश होती थीं। लेकिन कई दिनों से अब... Read More

गलती का एहसास

Updated on 26 September, 2014, 11:56
रिया, फैजल और अमन आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। तीनों पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद, डांस और नाटक के कार्यक्रमों में भी आगे रहते थे। फैजल गणित में बहुत होशियार था। एक दिन अमन ने उससे एक सवाल समझाने को कहा। फैजल उस समय साइंस का प्रोजेक्ट बना रहा था। वह बोला,... Read More

चूहा और संन्यासी

Updated on 12 September, 2014, 9:44
किसी जंगल में रह कर एक संन्यासी तपस्या करता था। जंगल के जानवर उस संन्यासी के पास प्रवचन सुनने आया करते थे। वे संन्यासी को चारों ओर से घेर लेते और वह जानवरों को अच्छा जीवन बिताने का उपदेश देता। उसी जंगल में एक छोटा-सा चूहा भी रहता था। वह भी... Read More

अंशुल का सवाल

Updated on 28 August, 2014, 12:45
पिछले कई दिनों से अंशुल परेशान चल रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि जिस बात के लिए उसे अक्सर मम्मी-पापा से डांट पड़ती है, वही काम जब मम्मी-पापा करते हैं तो दादू उन्हें क्यों नहीं कुछ कहते? चौथी कक्षा में पढ़ने वाला अंशुल अपने माता-पिता की इकलौती... Read More

वो आया खिड़की से

Updated on 21 August, 2014, 11:16
ऊकी चार साल का था। उसे और उसके भाई हर्षित को टीवी देखने का बहुत शौक था। पर पढ़ाई के वक्त टीवी देखने की घर में मनाही थी। पापा तो हर समय घर में रहते नहीं थे। बस मां ही दोनों की शरारतों से लोहा लेतीं। न पढ़ने पर मां... Read More

सच बोलने की हिम्मत

Updated on 19 August, 2014, 12:13
मोहित, अंकित और अमन तीनों अच्छे दोस्त थे। अंकित और अमन प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे और मोहित पास के ही सेंट्रल स्कूल में। मोहित के पिता सीआईएसएफ में काम करते थे। तीनों एक ही मोहल्ले में रहते थे। साथ-साथ घूमना और खेलना। पढ़ना भी साथ-साथ होता था। हालांकि मोहित की... Read More

गोलू की साइकिल

Updated on 5 August, 2014, 12:01
गोलू का पांचवीं कक्षा का रिजल्ट आया था। इस बार उसने अपने स्कूल में टॉप किया था। उसकी इस सफलता पर घर में सब लोग खुश थे। रिजल्ट आने से पहले गोलू के पापा ने उससे वायदा किया था कि अगर इस साल वह क्लास में फर्स्ट आया तो उसे... Read More

एलियंस की कहानी

Updated on 31 July, 2014, 12:22
दोस्तो, एलियंस का नाम सुनकर ही तुम चौंक जाते होगे। तुम्हारे जेहन में फिल्म 'कोई मिल गया' के एलियन की छवि आ जाती होगी। दुनिया में एलियंस को लेकर हर कोई जानना चाहता है। इनके अस्तित्व को जानने-समझने के लिए हाल ही में लोन सिग्नल प्रोजेक्ट के तहत ब्रह्मांड में... Read More

शालू और पिंक फ्रॉक

Updated on 30 July, 2014, 18:44
'मैं यह पिंक फ्रॉक लेकर रहूंगी।' शालू ने मम्मी से जोर देकर कहा। 'पर तुम्हारे पास तो ऐसी कई फ्रॉक हैं बेटी' मम्मी ने उसे मनाते हुए कहा। उस समय तो शालू उनकी बात मान गई, लेकिन उसे रात में भी उसी फ्रॉक के सपने आते रहे.. उसने सपने में देखा... Read More

मिल गया सबक

Updated on 23 July, 2014, 13:54
सुमित की आदत थी कि वह बिना किसी को सूचना दिए कहीं भी चला जाता या फिर किसी नए काम को हाथ में ले लेता। उसकी इस आदत से उसके परिवारवाले और दोस्त सभी परेशान थे। एक दिन अचानक वह किसी को बिना बताए पटना से दिल्ली चला गया। स्टेशन... Read More

कैसे इंसान हैं हम

Updated on 20 July, 2014, 22:26
मैं गजल हूं मैं कोई आज का अखबार नहीं। इस सियासत से मेरा कोई सरोकार नहीं।। सब यहाँ आगे निकल जाने पे आमादा हैं। साथ चलने के लिए कोई भी तैयार नहीं।। टुकड़ों-टुकड़ों में बटी है ये हमारी धरती। आसमानों पे मगर एक भी दीवार नहीं।। कैसे इंसान हैं हम साथ रहा करते हैं। प्यार करते हैं... Read More

गलती का अहसास

Updated on 20 July, 2014, 16:21
मीतू ने एक बार फिर प्रण लिया कि श्यामू काका के बगीचे से चोरी-छुपे अंबिया नहीं तोड़ूंगी। अगर मन करेगा, तो उनसे मांग लूंगी, पर जैसे ही उसकी नजर पेड़ की डाल पर झूल रही अंबिया के गुच्छों पर पड़ी। उसकी आंखें चमक उठीं और वह अपने मन को काबू... Read More

..हौसला मत खोना

Updated on 20 July, 2014, 16:19
'यार पता है, हमारे स्कूल में फिर से इंटर स्कूल डिबेट कॉम्पिटिशन आयोजित हो रहा है.. बहुत मजा आएगा।' स्कूल बस में मैं आराम से बैठा था कि तभी पीछे से किसी ने कहा। मुड़कर देखा तो मेरी क्लासमेट यह कहते हुए काफी उत्साहित नजर आई। पर मैं उदास हो... Read More

पापा की तरकीब

Updated on 18 July, 2014, 12:21
श्रुति सुपर कमांडो ध्रुव की कॉमिक सीरीज पढ़ती, तो ध्रुव के हाव-भाव की नकल करने लगती। कभी किसी नॉवेल के मुख्य पात्र की तरह करतब दिखाने लगती। एक दिन उसने टीवी में कुछ देखा, तो छत से छलांग लगाने की सोचने लगी..। उसे लगने लगा कि छत से कूदते ही वह... Read More

आत्मविश्वास की ताकत

Updated on 16 July, 2014, 21:24
शिखा और निशा दो बहनें थीं। शिखा आत्मविश्वासी थी, तो निशा में आत्मविश्वास की बेहद कमी थी। एक दिन मां ने दोनों को बाजार से कुछ सामान लाने के लिए भेजा। तभी शिखा का पैर साइकिल में फंस गया। यह देख निशा डर गई। वह सोचने लगी कि शिखा की... Read More

प्यार वही है

Updated on 14 July, 2014, 16:16
तुम मिलोगी कभी, यह उम्मीद नहीं है इस पड़ाव पर भी मेरी बेचैनी वही है। जहां बैठकर सपनों में खो जाते थे हम-तुम पार्क की वह बैंच आज भी वहीं है। तुम्हें भुलाने के लाख जतन किए मैंने फिर भी मई की वह दोपहर आज भी वहीं है। मैं जाता हूं वहां, बैंच को छूता हूं दूर... Read More